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भुलक्कड़

तुम्हारी शादी में नहीं आ पाया 
हो सके तो माफ़ कर देना
“सच्ची में” वजह वाले बहाने कई हैं
जब बताऊ तो यकीन कर लेना
 
बताओ तारीख तक भूल गया
शर्म भी नहीं आयी इस के लिए
शायद नहीं हूँ मैं हकदार 
इस रिश्ते के इसलिए
 
मुझे याद है की तुम 
बचपन में मेरी लाडली थी
दुलारी भी थी
बस भुलक्कड़ नहीं थी
 
मैं हूँ, और मैं भूल गया 
ये मत समझना की नाराज हूँ तुमसे
या तुम्हारी उस बचपन की गलती
का बदला ले रहा हूँ तुमसे
 
सच तो कई है पर तुम
यकीन नहीं करोगी
बहाना एक ही है की 
मैं भुलक्कड़ हूँ और मैं भूल गया
Published inPoetry